आगर मालवा- जिले के वन अमले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि बड़ोद क्षेत्र से लकड़ी के अवैध परिवहन के संदेह में दो ट्रैक्टर-ट्रॉली को जप्त कर रेंज ऑफिस में खड़ा किया गया, लेकिन अगले ही दिन वे रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली को कठघरे में ला खड़ा किया है।
यह कैसी कार्यवाही ?
सूत्रों के मुताबिक, रेंजर लक्ष्मीनारायण चौधरी के निर्देश पर कार्रवाई की गई। ट्रैक्टर-ट्रॉली को लकड़ी के अवैध परिवहन के आरोप में बड़ोद से आगर रेंज कार्यालय लाकर खड़ा किया गया और यह ट्रैक्टर ट्राली अगले दिन रेंज ऑफिस से अचानक गायब हो गए। गिरीश न्यूज़ को जो सूत्रों से खबर मिली है उसके अनुसार ट्रैक्टर ट्राली की जप्ती से लेकर ट्रैक्टर ट्राली के गायब होने तक कोई भी दस्तावेजी कार्रवाई वन विभाग द्वारा नहीं की गई है।
जब मौके पर मौजूद कर्मचारी से पूछताछ की गई तो उन्होंने कहा कि लकड़ी सूखी थी और नगरीय क्षेत्र में ही परिवहन हो रहा था। लेकिन यह तर्क कई नए प्रश्न खड़े करता है—क्या बिना औपचारिक कार्रवाई के वाहनों को रेंज ऑफिस लाना नियमसंगत है? और अगर वाहन रेंज परिसर में खड़े थे, तो वे बिना किसी रिकॉर्ड के कैसे गायब हो गए? और यदि रेंज से गायब हो गए तो फिर रेंजर ने क्या अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में कोई सूचना दी ?
रेंजर से नहीं देते बन रहा कोई जवाब
रेंजर लक्ष्मी नारायण चौधरी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया। इससे संदेह और गहरा गया है।
वन मंडल अधिकारी ने दिया जांच का आदेश-
इस मामले की जानकारी जब वन मंडल अधिकारी हेमलता शाह को दी गई, तो उन्होंने डीएफओ को जांच के निर्देश देने और प्रतिवेदन के आधार पर आगे कार्रवाई की बात कही। वहीं वन विभाग आगर एसडीओ फतेहसिंह निमामा ने स्वीकार किया कि प्रथम दृष्टया लापरवाही गंभीर प्रतीत होती है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं-
अगर लकड़ी वैध थी, तो जप्ति और रेंज ऑफिस तक लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
यदि जप्ति हुई, तो जब्ती की विधिवत कार्रवाई और रिकॉर्ड कहाँ है?
रेंज परिसर से ट्रैक्टर-ट्रॉली “गायब” कैसे हो गए?
क्या इस घटना की सूचना वरिष्ठ कार्यालय को तत्काल दी गई?
हम आपको बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम में यदि प्रकरण विधिवत दर्ज होता, तो लकड़ी के साथ दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉली भी राजसात करने पड़ सकते थे तो फिर बिना कागजी कार्रवाई के इस तरह से ट्रैक्टर ट्राली की जप्ति और फिर उनका गायब हो जाना क्या एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार की ओर इंगित नहीं कर रहा हैं?
इस पूरे घटनाक्रम मे पारदर्शिता का अभाव और विभागीय चुप्पी संदेह को और गहरा रही है। जिस तरह से रेंजर का आचरण सामने आया है, वह इस कार्रवाई को संदिग्ध बनाता है और संभावित गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
बनी हुई है हमारी निगाह –
गिरीश न्यूज़ इस मामले की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगा और देखेगा कि विभाग इस संवेदनशील प्रकरण को किस तरह संभालता है—क्या सच्चाई सामने आएगी या फाइलों में दबी रह जाएगी?
