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आगर-मालवा-

जिले में लगातार गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती प्रीति यादव ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (संशोधित 2002 एवं 2022) के तहत आगर-मालवा जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है।

जारी आदेश के अनुसार अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत पूरे जिले में अशासकीय एवं निजी नलकूप खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। बिना संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के कोई भी बोरिंग मशीन जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगी और न ही नए नलकूप का खनन किया जा सकेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से नलकूप खनन करने पर मशीन जब्त की जाएगी और संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। इसके लिए राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई हेतु अधिकृत किया गया है।

हालांकि, शासकीय योजनाओं के तहत किए जाने वाले नलकूप उत्खनन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर निजी जल स्रोतों का अधिग्रहण कर उन्हें सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।

यह आदेश 25 मार्च 2026 से प्रभावशील होकर 31 जुलाई 2026 तक लागू रहेगा। विशेष परिस्थितियों में जांच के बाद अनुमति देने का अधिकार संबंधित एसडीएम को दिया गया है।

दंड का प्रावधान-

आदेश का उल्लंघन करने पर प्रथम बार 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि पुनरावृत्ति की स्थिति में 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दो वर्ष तक का कारावास हो सकता है।

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