वर्षो पहले सरकारी एजेंसी ने रुतबे से किया सड़क का निर्माण। जिनकी जमीन पर बनी सड़क उन किसानों को भूला शासन-प्रशासन। अब न्यायालय का मिला साथ। न्यायालय के निर्णय के बाद आज पीड़ित किसानों ने स्टेट हाईवे किया 5 घंटे तक जाम। 7 दिवस में सर्वे के लिखित आदेश देखने के बाद माने आक्रोषित किसान
आगर मालवा – अपने मुआवजे के लिए पिछले कई वर्षों से शासन-प्रशासन के सामने संघर्ष कर रहे किसानों को अब जाकर न्यायालय से राहत मिली है और पीड़ित किसानों के पक्ष में न्यायालय द्वारा 29 जनवरी को जारी स्टे के बाद पीड़ित किसानों ने अपनी जमीन पर कब्जा करते हुए वहां से निकल रहे सोयत-माचलपुर स्टेट हाईवे को 5 घंटे तक जाम कर दिया।
स्टेट हाईवे पर जाम लगते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ और उसने घटनास्थल पर पहुंचकर आक्रोशित किसानों को समझाने का प्रयास किया परंतु आंदोलनरत किसान तब तक नहीं माने जब तक कि उन्हें सोयत तहसीलदार का सर्वे हेतु गठित दल और उसके द्वारा 7 दिन में सर्वे करने का एक लिखित आदेश नहीं दिखाया गया।
पीड़ित किसानों का कहना है कि यदि 7 दिन में सर्वे नहीं हुआ तो हम फिर से आंदोलन करेंगे।
हम आपको बता दे कि सरकारी एजेंसीयों ने अपने रुतबे का फायदा उठाते हुए वर्षो पहले किसानों की जमीन का सर्वे और अधिग्रहण किए बिना उस पर सोयत-माचलपुर रोड तो बना दी पर रोड बनाने के बाद फिर प्रभावित किसानों की सुध लेने के लिए कोई आगे नहीं आया।उसके बाद पीड़ित किसान वर्षों से शासन-प्रशासन के चक्कर लगाते रहे पर उन्हें हर जगह सिर्फ बेरुखी या फिर झूठा आश्वासन ही मिला।
अंततः पीड़ित एवं निराश किसानों ने न्यायालय की शरण ली और अब जाकर उन्हें न्यायालय का साथ मिला है।
किसानों ने बताया कि न्यायालय ने 29 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी करते हुए उनके पक्ष में स्टे देते हुए बिना सर्वे बिना मुआवजा बनाई गई सड़क को मनमाना मानते हुए किसानों को वापस अपनी जमीन पर कब्जा करते हुए प्रकरण की अंतिम सुनवाई तक उन्हें यथा स्थिति बनाए रखने का अधिकार दिया है।
आज जब किसानों ने स्टेट हाईवे पर जाम लगाया तो उसके बाद एमपीआरडीसी ने सुसनेर एसडीएम को संबोधित एक पत्र लिखा जिसमें सड़क में आई पीड़ित किसानों की भूमि के सर्वे के लिए एसडीम को लिखा गया।

उसके बाद फिर सामने सोयत तहसीलदार का एक लिखित आदेश सामने आया जिसमें राजस्व निरीक्षक के नेतृत्व में पांच पटवारी के साथ कुल छह सदस्यी जांच दल का गठन किया गया है और इस दल को 7 दिवस के अंदर सर्वे का कार्य पूरा करने के लिए आदेशित किया गया है।

सोयत तहसीलदार के इसी आदेश को देखने के बाद आंदोलनरत किसानो ने अपना आंदोलन स्थगित करते हुए 7 दिन में न्याय नहीं मिलने पर प्रशासन को अपना आंदोलन पुनः शुरू करने की चेतावनी दी है।
