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आगर मालवा-

जिले में हो रही कलेक्टर की जनसुनवाई में आज एक रोचक मामला सामने आया है। वैसे जनसुनवाई में समस्या हल ना हो और आवेदक अपनी समस्या लेकर बार-बार कलेक्टर के पास पहुंचे यह कोई अच्छी बात तो नहीं पर आम जनता की मजबूरी के चलते एक साधारण सा प्रचलन जरूर बन गया है।

पर अब इससे भी बढ़कर एक मामला आगर मालवा जिले में हो रही कलेक्टर की जनसुनवाई में सामने आया है।

किसान करण सिंह निवासी ग्राम लोधाखेड़ी सुसनेर जो पिछले कुछ वर्षों से उनसे सम्बंधित जमीन का फर्जी नामांतरण और फिर विक्रय की शिकायत को लेकर अधिकारियों और कलेक्टर के यहां लगातार जनसुनवाई में आवेदन दे रहे हैं का आरोप है कि पटवारी रामगोपाल रातडिया ने जानबूझकर भ्रष्टाचार करते हुए फर्जी रूप से गलत लोगों का नाम जमीन पर चढ़या और फिर उस जमीन को बेचकर उसकी रजिस्ट्री भी करवा दी गई।

अब यदि आवेदक करण सिंह की माने तो पिछले कई सालों से कर रहे इस शिकायत की आज तक अधिकारियों द्वारा जांच नहीं करवाई गई है और हर जगह से सिर्फ उन्हें झूठा आश्वासन मिलता रहा है और वह भी लगातार इस शिकायत को बार-बार उठाते रहे जिसके फल स्वरुप उनके पास जनसुनवाई के निपटारा कार्डों का ढेर लग गया है पर किसी भी निपटारा कार्ड से उनकी शिकायत का निपटारा नहीं हुआ है।

अब इस पूरे मामले में खास मोड आज उस समय आ गया जब पीड़ित कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा तो कलेक्टर महोदय ने न सिर्फ उसकी शिकायत लेने से मना कर दिया बल्कि अपने अधीनस्थ अधिकारियों को भी शिकायत लेने से मना करते हुए उसे निपटारा कार्ड जारी करने से भी मना कर दिया गया।

यदि पीड़ित का यह आरोप सही है तो यह एक काफी गंभीर मामला है और प्रदेश के मुखिया को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

हालांकि कलेक्टर महोदय की जवाबदेही का अंदाजा आप इस बात से ही लगाया जा सकता है कि कलेक्टर की जनसुनवाई में उन्होंने पत्रकारों की एंट्री बैन कर दी हे और उनका कहना है उन्हें जो भी कहना होगा या जानकारी देना होगा वह वो पीआरओ के माध्यम से ही उपलब्ध कराएंगे।

हालांकि लगातार पारदर्शी शासन और प्रशासनिक व्यवस्था की बात जिम्मेदारों द्वारा कही जाती है पर इन दिनों जिस तरह से नौकरशाहों का आचरण सामने आ रहा है वह जिम्मेदारो के इन दावों को पूरी तरह खोखला साबित करता है। लगता है यह लोग भूल जाते हैं कि इन्हें एक दिन इसी जनता के पास वोट लेने जाना होगा और गैर जिम्मेदार नौकरशाह इसी तरह उनका उस दिन भट्टा बिठा देंगे।

हालांकि अब इस प्रकरण में पीड़ित ने गिरीश न्यूज़ को बताया कि यदि उसकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कलेक्टर कार्यालय में आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा

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