आगर मालवा –
एक मां अपने खून-पसीने से सींचकर अपने बच्चों को इस काबिल बनाती है कि वे बुढ़ापे में उसकी लाठी बन सकें। लेकिन सुसनेर के वार्ड क्रमांक 5 से मानवता को तार-तार करने वाला एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ तीन बेटों की बुजुर्ग मां कौशल्या बाई को उनके ही घर में ताले के पीछे कैद कर दिया गया। गुप्त नवरात्रि के पावन दिनों में सामने आई इस हृदय विदारक घटना ने पूरे नगर को झकझोर कर रख दिया है।
शुक्रवार सुबह जब पड़ोसियों की सजगता और जनप्रतिनिधियों की तत्परता काम आई, तब जाकर इस बेबस मां को बंद कमरे के अंधेरे से मुक्ति मिल सकी।
स्थानीय रहवासियों को पिछले कुछ दिनों से बुजुर्ग कौशल्या बाई के घर में हलचल न होने और बाहर से ताला लटके होने पर गहरा संदेह हुआ। अनहोनी की आशंका को देखते हुए वार्ड वासियों ने तुरंत स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मामले की सूचना दी।
सूचना मिलते ही नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप सोनी और पार्षद प्रतिनिधि पवन शर्मा सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता तुरंत मौके पर पहुंचे। जब बंद घर का ताला खुलवाया गया, तो अंदर का नजारा देखकर हर किसी की रूह कांप गई। वयोवृद्ध मां को कमरे के भीतर कैद कर रखा गया था। जनप्रतिनिधियों ने तुरंत उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और सीधे पुलिस थाने लेकर पहुंचे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कौशल्या बाई के तीनों बेटों और बहुओं को थाने तलब किया। पुलिस अधिकारियों और उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने बेटों-बहुओं को कड़ी फटकार लगाते हुए समझाइश दी।
काफी देर चली बातचीत और खुद बुजुर्ग मां कौशल्या बाई की सहमति के बाद यह तय हुआ कि अब से वे अपने सबसे छोटे बेटे गणेश के साथ रहेंगी। छोटे बेटे ने भी मां को अपने साथ रखने और पूरी सेवा करने की जिम्मेदारी स्वीकार की।
इस संवेदनशील मामले पर दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप सोनी ने कहा:
”पिछले कुछ दिनों से वार्ड के नागरिकों द्वारा लगातार सूचना मिल रही थी कि एक वृद्ध महिला को घर में बंधक बनाकर रखा गया है। मौके पर जाकर देखा तो सचमुच ताला लगा हुआ था। यह बेहद शर्मनाक कृत्य है। लोग घरों में पशुओं को भी बड़े चाव से पालते हैं, यह तो फिर भी जन्म देने वाली मां है। मां बहुत नसीब वालों को मिलती है। फिलहाल समझाइश के बाद महिला को छोटे बेटे के साथ भेज दिया गया है।”
इस घटना ने एक बार फिर आधुनिक समाज की खोखली होती संवेदनाओं को उजागर कर दिया है। नगर के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि जिस मां ने तिनका-तिनका जोड़कर अपने तीन बेटों को पाला-पोसा और समाज में खड़ा किया, उन्हीं बेटों ने बुढ़ापे में अपनी मां को एक कमरे में लावारिसों की तरह ताले में बंद कर दिया। हालांकि, पुलिस और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से फिलहाल इस संवेदनशील मामले का पटाक्षेप हो गया है, लेकिन यह घटना क्षेत्र में गहरी चर्चा का विषय बनी हुई है।
