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आगर-मालवा। जिले के शिक्षा विभाग में में बीएसी-सीएसी पदों के लिए हुई काउंसलिंग प्रक्रिया अब गंभीर सवालों के घेरे में है। अभ्यर्थियों ने कलेक्टर को आवेदन देकर काउंसलिंग में कथित अनियमितताओं, सहमति के विपरीत नियुक्तियों और योग्यता से जुड़ी विसंगतियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि इस प्रकरण में उचित जांच नहीं हुई तो वह न्यायालय भी जा सकते हैं।

​मामला राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश क्रमांक/राशिके/स्था./2026/3740 भोपाल दिनांक 24/06/2026 से जुड़ा है। आवेदन के अनुसार जिला परियोजना समन्वयक द्वारा बीएसी/सीएसी काउंसलिंग दिनांक 05/08/2026 को कराई गई थी। नियमतः अंतिम सूची 13/08/2026 को नोटिस बोर्ड पर चस्पा होनी थी और 20/08/2026 को कलेक्टर महोदय से अनुमोदन के बाद जारी होनी थी, लेकिन आरोप है कि निर्धारित अवधि में सूची जारी नहीं की गई और करीब 1 माह 9 दिन बाद काट-छांट कर अंतिम सूची प्रकाशित की गई।

​आवेदन में लगाए गए मुख्य आरोप:

​सहमति एक पद पर, नियुक्ति दूसरे पर: शिक्षकों से जिन पदों एवं स्थानों के लिए सहमति ली गई थी, अंतिम सूची में उन्हें अलग स्थानों पर नियुक्त कर दिया गया।

​योग्यता को लेकर सवाल: सुसनेर विकासखंड में बीएसी पद पर हिंदी विषय के लिए हुई नियुक्ति पर आरोप है कि संबंधित अभ्यर्थी के पास निर्धारित विषय में स्नातक की योग्यता नहीं होने के बावजूद नियुक्ति दी गई। श्री सुंदर यादव द्वारा बीएसी पद हेतु सुसनेर को हिंदी विषय से सहमति दी गई थी, उन्हें हटाकर श्री रामदयाल गुर्जर को नियुक्ति दे दी गई, जबकि उनका संबंधित विषय में स्नातक नहीं है।

​सहमति देने के बाद भी पद से वंचित: विनोद कुमार शर्मा द्वारा आगर में बीएसी पद पर सहमति दी गई थी, पर उन्हें पद से पृथक कर श्रीमती शगुप्ता सुल्ताना को नियुक्ति दी गई। वहीं सुधीर कुमार उपाध्याय ने सीएसी शा.उ.मा.वि. द्वारा हेतु सहमति दी थी, उन्हें हटाकर विनोद कुमार शर्मा को नियुक्ति दे दी गई।

​मनमाने बदलाव का आरोप: श्रीमती प्रेमलता मेधवंशी ने सीएसी बापचा पर सहमति दी थी, पर उन्हें कन्या उ.मा.वि. कानड़ में नियुक्ति दी गई, जबकि सीएसी बापचा पर श्री सुंदर यादव को नियुक्त कर दिया गया, जबकि दोनों ने उक्त स्थानों का चयन ही नहीं किया था।

​बीएसी-सीएसी की पृथक सूची पर आपत्ति: जिला परियोजना द्वारा बीएसी/सीएसी की पृथक-पृथक सूची जारी की गई और निर्देश दिया गया कि बीएसी की सूची पर सहमति न देने वाले को सीएसी नहीं बनाया जाएगा, जिससे कई वरिष्ठ अभ्यर्थी वंचित रह गए।

​आवेदकों ने मांग की है कि काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा हस्ताक्षरित मूल सूची और बाद में जारी अंतिम सूची को आमने-सामने रखकर मिलान कराया जाए। प्रत्येक अभ्यर्थी की सहमति, वरिष्ठता, विषय और शैक्षणिक योग्यता का बिंदुवार सत्यापन कराया जाए।

​ इस प्रकरण में आरटीआई के आवेदन भी लगाए जा चुके हैं और संबंधित पक्षों द्वारा बताया जा रहा है कि यदि मामले का समय-सीमा में उचित निराकरण नहीं किया जाता है तो अभ्यर्थी न्यायालय की शरण लेंने को विवश होंगे।

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