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​आगर मालवा –

सुसनेर-जामुनिया रोड पर बीते 1 जून को राहुल यादव के साथ हुई बर्बरता, जान से मारने की कोशिश और 80 हजार रुपये की सनसनीखेज लूट के मामले में एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे क्षेत्र के सर्व समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।

FIR में फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप, अस्पताल से पीड़ित ने जारी किया वीडियो-

​पुलिस की FIR में दर्शाया गया है कि घटना के बाद एम्बुलेंस में राहुल ने अपने परिजनों को बयान दिया था कि उसकी और आरोपी गोविंद के बीच पैसों के लेन-देन का विवाद था, जिसके चलते उसने चाकू मारा गया हे । अब इस थ्योरी को पीड़ित पक्ष ने सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह ‘फर्जी’ और ‘झूठ’ करार दिया है। उज्जैन के अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे घायल राहुल यादव और उनके पिता ने वीडियो जारी कर साफ किया है कि राहुल और गोविंद के बीच किसी भी प्रकार का कोई आर्थिक लेन-देन नहीं था। पीड़ित और उसके परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को कभी ऐसा कोई बयान दिया ही नहीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना बयान के FIR में यह मनगढ़ंत कहानी किसने और किसके इशारे पर दर्ज की गई ?

सर्व समाज में आक्रोश: “न्याय की जगह हो रहा फर्जीवाड़ा”-

​इस मामले को लेकर सर्व समाज आगर में गहरा रोष है। समाज के प्रबुद्ध जनों और युवाओं का कहना है कि पीड़ित राहुल को न्याय मिलने और अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी होने की बजाय, केस को कमजोर करने के लिए जांच में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। समाज ने मांग की है कि इस बात की उच्च स्तरीय जांच हो कि FIR में यह झूठी बात किसने जोड़ी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

लूट की धारा बढ़ी, लेकिन सवाल बरकरार: प्रवीण यादव

​इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े प्रवीण यादव ने पुलिस प्रशासन पर तीखे सवाल दागे हैं। प्रवीण यादव ने घायल राहुल यादव और उनके परिजनों के वीडियो साक्ष्य के रूप में सामने लाते हुए कहा कि

​”यह अच्छी बात है कि पुलिस ने अब अपराध में लूट की धारा बढ़ा दी है, लेकिन सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जब पीड़ित या उसके किसी परिजन ने कभी पैसों के लेन-देन की बात कही ही नहीं, तो यह प्रथम सूचना प्रतिवेदन (FIR) में किस तरह आई? इस गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी हो, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।”

थाना प्रभारी अक्षय सिंह बेस का पक्ष-

​इस पूरे विवाद और एफआईआर में कथित फर्जीवाड़े को लेकर जब ‘गिरीश न्यूज़’ द्वारा सुसनेर थाना प्रभारी अक्षय सिंह बेस से सीधी चर्चा की गई, तो उन्होंने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा:

​”प्रकरण में गंभीरता को देखते हुए लूट की धारा का इजाफा (इजाफा) किया जा चुका है। जहां तक एफआईआर में पैसे के लेन-देन के उल्लेख का मामला है, तो कानूनी तौर पर उसका कोई विशेष महत्व नहीं है। मामले की आगे की विवेचना और कानूनी कार्रवाई पूरी तरह से पीड़ित के वास्तविक बयानों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।”

बड़ा सवाल: साख बचाने के लिए क्या करेगी पुलिस ?

​भले ही पुलिस इसे तकनीकी रूप से ‘कम महत्व’ का बता रही हो, लेकिन जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि शुरुआती दस्तावेजों में इस तरह का फेरबदल क्यों हुआ? क्या यह आरोपियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश थी या पुलिस की जल्दबाजी? फिलहाल, सर्व समाज के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई और फरार अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने का भारी दबाव है।

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