आगर-मालवा-
जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर श्रीमती प्रीति यादव द्वारा भारतीय सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में रबी फसल, विशेष रूप से गेहूं कटाई के बाद खेतों में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
जारी आदेश के अनुसार खेतों में नरवाई जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है, जन स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा जीव-जंतुओं की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न होता है। इन कारणों से यह प्रतिबंध लागू किया गया है।
पर्यावरण विभाग की अधिसूचना के अनुसार नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि भी निर्धारित की गई है। इसके तहत 2 एकड़ से कम भूमि पर अवशेष जलाने पर 2500 रुपए, 2 से 5 एकड़ भूमि पर 5000 रुपए तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 15000 रुपए प्रति घटना की दर से राशि वसूली जाएगी।
जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा सख्ती बरती जा रही है। अनुभाग आगर-बड़ौद में 10 किसानों पर 10,000 रुपए तथा अनुभाग सुसनेर-नलखेड़ा में 24 किसानों पर 25,000 रुपए का अर्थदण्ड अधिरोपित करने हेतु पंचनामे तैयार कर कार्रवाई की जा रही है।
उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री विजय चौरसिया ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाएं, बल्कि उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करें। नरवाई को गहरी जुताई कर मिट्टी में मिलाएं, डीकंपोजर किट का उपयोग करें अथवा भूसा बनाकर गौशालाओं में उपयोग करें, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी तथा पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।
