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आगर मालवा-

सेमली, कुंडला खुर्द एवं आसपास के ग्रामीणों द्वारा जिरकॉन एडवांस्ड फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड के इथेनॉल उद्योग से निकलने वाले पानी एवं कथित प्रदूषण को लेकर की गई शिकायतों के बाद मंगलवार को मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने औद्योगिक इकाई का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उद्योग में पानी के उपयोग, उपयोग के बाद निकलने वाले पानी, उसके ट्रीटमेंट तथा निकासी व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान मानव अधिकार आयोग के डीआईजी मुकेश कुमार श्रीवास्तव, कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना, पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों से चर्चा करते हुए उद्योग से संबंधित लिए गए पानी के सैंपल तथा उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर पानी की गुणवत्ता की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने औद्योगिक गतिविधियों के कारण आमजन के स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े, इसके लिए आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई में ग्रामीणों ने उठाया था पानी प्रदूषण का मुद्दा

गौरतलब है कि कलेक्ट्रेट में मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह द्वारा की गई जनसुनवाई के दौरान कुंडला खुर्द के ग्रामीणों ने जिरकॉन उद्योग से निकलने वाले पानी और उससे उत्पन्न समस्याओं की ओर आयोग का ध्यान आकृष्ट कराया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि उद्योग से निकलने वाला पानी नाले एवं जलस्रोतों को प्रभावित कर रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीणों और पशुधन के लिए परेशानी उत्पन्न हो रही है।

ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग अध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर औद्योगिक इकाई की स्थिति का जायजा लिया और पानी की निकासी एवं ट्रीटमेंट व्यवस्था की जानकारी ली।

तहसीलदार ने भी आयोग की सुनवाई के लिए पक्षकारों को बुलाया-

इसी मामले में तहसीलदार आगर द्वारा 17 अगस्त को जारी सूचना पत्र में संबंधित ग्रामीणों को 18 अगस्त को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। पत्र के अनुसार मानव अधिकार आयोग से प्राप्त आवेदन पत्रों पर सुनवाई के दौरान जिरकॉन कंपनी से संबंधित शिकायतों का निराकरण भी किया जाना था।

ऐसे में मंगलवार को आयोग अध्यक्ष का उद्योग का निरीक्षण ग्रामीणों की शिकायतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों, पानी के सैंपल एवं जांच रिपोर्ट तथा संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

ग्राम पंचायत सेमली भी जारी कर चूका जिरकॉन कम्पनी को कारण बताओ नोटिस-

मामले में ग्राम पंचायत सेमली द्वारा भी जिरकॉन एडवांस फ्यूल प्रा. लि. को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था । पंचायत के पत्र में उद्योग की स्थापना के समय दिए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) की शर्तों एवं कंपनी द्वारा दिए गए आश्वासनों के पालन को लेकर कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था ।

पंचायत ने पत्र में आरोपित शिकायतों में Zero Liquid Discharge (ZLD) प्रणाली के पालन, प्राकृतिक नाले में औद्योगिक अपशिष्टयुक्त जल छोड़े जाने, स्वीकृत ग्रीन स्पेस के विकास, स्वीकृत ओपन स्पेस में निर्माण तथा प्राकृतिक नाले की भूमि पर निर्माण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि इन गतिविधियों से आसपास के जलस्रोतों, पर्यावरण, जनस्वास्थ्य, पशुधन एवं ग्रामीणों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। पंचायत ने कंपनी को सात दिवस के भीतर दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित स्पष्ट एवं संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में पूर्व में जारी अनापत्ति प्रमाण-पत्र को वापस लेने/निरस्त करने की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी –

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