आगर-मालवा। सुसनेर नगर परिषद उपचुनाव का रण अब दिलचस्प मोड़ पर आ गया हे।
देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार के साथ ही भाजपा के प्रत्याशी प्रदीप सोनी के सहज सरल स्वभाव के चलते नगर में भाजपा की जबरदस्त लहर दिख रही है, लेकिन मिल रही जानकारी अनुसार जमीनी हकीकत में कांग्रेस ने चुपचाप मतदाताओं में सेंध लगाना शुरू कर दिया है।
भोपाल विधायक आरिफ मसूद ने मुस्लिम वोट में लगाई सेंध
कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए भोपाल विधायक आरिफ मसूद को मैदान में उतारा है। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को मसूद ने सुसनेर में अंदरखाने जबरदस्त काम किया है। पहले भाजपा के पूर्व विधायक राणा विक्रम सिंह के चलते बंटा हुआ दिख रहा मुस्लिम मतदाता अब एकजुट होकर कांग्रेस की ओर झुकता दिख रहा है, जो चुनाव में बड़ा फैक्टर बन सकता है।
सबसे बड़ा फैक्टर – मौन मतदाता
गली-मोहल्ले में हर प्रत्याशी को एक ही जवाब मिल रहा है – “आप ही को देंगे”। लेकिन भीतरखाने मतदाता पुराने कार्यकाल का हिसाब खोल रहा है। नालियों की सफाई, बंद स्ट्रीट लाइट, पेयजल, अधूरी गलियां, पार्षदों से नाराजगी और इस कार्यकाल में चली खींचतान व भ्रष्टाचार को लेकर आमजन में गहरी नाराजगी है। “वादे बड़े, काम आधे-अधूरे” – यही दर्द इस बार वोट की चोट बन सकता है। कांग्रेस इसी नाराजगी को टारगेट कर घर-घर संपर्क कर रही है, जबकि बताया जा रहा हे कि भाजपा अभी भी लहर के भरोसे मस्त है और यह अति आत्मविश्वास भाजपा को भारी भी पड़ सकता है।
क्या है भाजपा की रणनीति ?
भाजपा की अधिकांश रणनीति अब पूर्व विधायक राणा विक्रम सिंह के जनाधार पर टिकी है। क्योंकि ऐसा माना जा रहा हे कि भाजपा यह चुनाव राणा की अगुवाई में लड़ रही है। राणा के पास लंबा चुनावी अनुभव, बेहतरीन रणनीति और हर समाज-वर्ग में पकड़ है, यहां तक कि मुस्लिम वोट बैंक में भी उनकी गहरी पैठ मानी जाती है और वे भी घर-घर संपर्क कर भाजपा को मजबूत करने का प्रयास कर रहे है।
आरिफ Vs राणा – प्रतिष्ठा का सवाल
अब मुकाबला साफ है – एक तरफ आरिफ मसूद का मुस्लिम कार्ड, दूसरी तरफ राणा का जनाधार और विकास कार्ड। मौन मतदाता किसके साथ जाएगा, ये परिणाम ही बताएगा, लेकिन ये उपचुनाव अब आरिफ बनाम राणा की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। भाजपा खेमा अभी भी सामान्य हिंदू वोट और विकास के नाम पर आश्वस्त है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक में जो सेंधमारी की है, वो आखिरी दो दिन में चुनाव का पासा पलट सकती है। ऊपर से सबको आश्वासन देने वाला मौन मतदाता, अंदर से पुराने कार्यकाल का दर्द और अब मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण – इन तीनों ने इस उपचुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। अब देखना ये है कि भाजपा की लहर भारी पड़ती है या कांग्रेस आरिफ फेक्टर ?
कांग्रेस का आरोप: महाराज और नाराज में उलझी भाजपा
शुक्रवार को तराना विधायक महेश परमार, राघोगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह, महिदपुर विधायक दिनेश जैन बॉस, सुसनेर विधायक भैरूसिंह परिहार बापू सहित दिग्गजों ने नुक्कड़ सभाएं कीं। कांग्रेस ने भाजपा के महाराज और नाराज दो गुटों में बंटे होने का दावा किया और दतिया की तर्ज पर “वक्त है बदलाव का” का स्लोगन देकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा। कांग्रेस नेता भाजपा प्रत्याशी को भी आड़े हाथों लेते नजर आए। अब सबकी नजर शनिवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के रोड शो पर है, जो इस घाव पर मरहम लगाने आ रहे हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी का इमोशनल टच
कांग्रेस प्रत्याशी विष्णु पाटीदार का “भ्रष्टाचार नहीं करने की शपथ” और अधूरे कामों को निजी खर्च से कराने का वादा आमजन को इमोशनल टच कर रहा है, वहीं भाजपा बाहरी पदाधिकारियों और बड़े नेताओं के भरोसे उम्मीद लगाए बैठी है।
क्या पर्सनल संपर्क या पिछला परफॉर्मेंस देगा जीत?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार चुनाव प्रचार से नहीं, बल्कि पर्सनल संपर्क और पुराने कार्यकाल के परफॉर्मेंस से जीता जाएगा। जो प्रत्याशी मतदाता के इस मौन दर्द को समझ लेगा, जीत उसी की झोली में जाएगी। फिलहाल आरिफ मसूद की एंट्री और भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी के बाद बताया जा रहा हे कि सुसनेर में मुकाबला एकतरफा नहीं, बल्कि कांटे का होता दिख रहा है। पुराने कार्यकाल के अधूरे कामों को लेकर जो नाराजगी हे , उसे “विकास के नए वादे” से कवर करने की रणनीति पर भी काम चल रहा है।
