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​आगर मालवा-

मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ के आह्वान पर अपनी लंबित और न्यायोचित मांगों को लेकर कोटवारों का प्रथम चरण का आंदोलन 22 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश के सभी जिलों में धरना प्रदर्शन एवं सत्याग्रह आंदोलन समाप्त हो गया हे ।

​इसी क्रम में कोटवार संघ ने नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी लोक भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रत्यक्ष मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और जल्द से जल्द अपनी समस्याओं के निराकरण की मांग की। इसके अलावा, संघ के जिलाध्यक्ष विक्रम परमार के नेतृत्व में पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष नितिन रघुवंशी, डिप्टी कलेक्टर अर्पिता राय तथा क्षेत्रीय विधायक महोदय को भी ज्ञापन देकर कोटवारों की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया गया।

​प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से असंतोष

कोटवार संघ का कहना है कि लगातार ज्ञापन और प्रदर्शन के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे प्रदेशभर के कोटवारों में गहरा असंतोष है।

​प्रमुख मांगें:

प्रदेश के कोटवार संघ की मांगों में ​शासकीय कर्मचारी का दर्जा व पदोन्नति: प्रदेश के सभी लगभग 38,000 कोटवारों को नियमित शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए तथा 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वालों को योग्यतानुसार सहायक पटवारी, भृत्य, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि समकक्ष पदों पर पदोन्नत किया जाए।

​सेवा भूमि का मालिकाना हक: अंग्रेजों के समय से मिल रही सेवा भूमि (मालगुजार भूमि) से कोटवारों के नाम हटाए जाने का विरोध करते हुए पुनः खसरे में उनका नाम दर्ज कर मालिकाना हक देने की मांग की गई है।

​मानदेय वृद्धि एवं एरियर: कोटवार पंचायत 2023 की घोषणा के अनुसार ₹500 प्रतिवर्ष की वेतन वृद्धि का आदेश सभी श्रेणियों (भूमिवारी कोटवारों सहित) के लिए लागू किया जाए।

​वर्दी राशि का सीधा भुगतान: वर्दी क्रय में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए और पूर्व की तरह वर्दी की राशि कोटवारों के बैंक खाते में सीधी ट्रांसफर की जाए।

​अनुग्रह सहायता राशि: सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर मिलने वाली अनुग्रह राशि को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख तथा सेवानिवृत्ति राशि को ₹5 लाख किया जाए।

​31 अक्टूबर को भोपाल में होगा महाआंदोलन

आगर मालवा जिलाध्यक्ष विक्रम परमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शासन ने समय रहते कोटवारों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 31 अक्टूबर को प्रदेशभर के हजारों कोटवार भोपाल पहुंचकर महारैली एवं महा सत्याग्रह आंदोलन करेंगे। जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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