आगर-मालवा। जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाली सोयतकला तहसील से प्रशासन की कार्यप्रणाली और दबंगों के हौसलों को उजागर करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ ग्राम श्रीपतपुरा और बराई के दर्जनों किसान उच्च अधिकारियों के आदेश की कॉपियां हाथों में लेकर न्याय के लिए भटक रहे हैं। आरोप है कि अपर कलेक्टर न्यायालय द्वारा तहसीलदार के शासकीय रास्ता खोलने के स्पष्ट अंतरिम आदेश दिए जाने को पुस्ट करने के बावजूद, स्थानीय राजस्व अमला (तहसीलदार सोयतकला) इस आदेश का पालन धरातल पर कराने में नाकाम नजर आ रहा है ।
क्या है पूरा मामला ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम श्रीपतपुरा और बराई (तहसील सोयतकला ) के मध्य कृषि भूमि सर्वे नंबर 81, 46, 2, 7, 8, 9 आदि पर आने-जाने के लिए एक शासकीय रास्ता (बराई से श्रीपतपुरा मार्ग की कांकड़ से प्रारंभ) स्वीकृत है। इस रास्ते का उपयोग स्थानीय किसान अपने कृषि वाहनों और ट्रैक्टरों को खेतों तक ले जाने के लिए सालों से करते आ रहे हैं। पीड़ित किसानों का आरोप है कि ग्राम बराई के ही कुछ रसूखदार और दबंग व्यक्तियों (शांताराम दांगी, दिनेश दांगी, गोपाल दांगी आदि) ने इस शासकीय रास्ते पर अवैध रूप से कब्जा कर इसे पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।
अधिकारियों के आदेश भी साबित हो रहे ‘कागजी शेर’
हैरानी की बात यह है कि इस मामले में प्रारम्भिक रूप से पीड़ित किसान पहले तहसीलदार सोयतकला द्वारा 7 अगस्त 2025 को रास्ता खोलने का अंतरिम आदेश लेकर और फिर इसके बाद मामला जब उच्च स्तर पर पहुँचा, तो माननीय अपर कलेक्टर महोदय ने भी आदेश क्रमांक 0031 / 2025-26 दिनांक 11 मार्च 2026 जारी कर तहसीलदार सोयत कला के आदेश को सही ठहराते हुए रास्ता खुलवाने के आदेश को सही माना । लेकिन आदेश जारी होने के महीनों बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है। किसानों का कहना है कि वे कई बार तहसीलदार कार्यालय के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण दबंगों के हौसले बुलंद हैं और उन्होंने रास्ता दोबारा बंद कर दिया है।
विरोध करने पर मारपीट, महिलाओं को आगे कर झूठे केस की धमकी
किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि जब भी वे अपने कृषि वाहनों के साथ इस शासकीय रास्ते से गुजरने का प्रयास करते हैं, तो आरोपी पक्ष उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो जाता है। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, आरोपियों द्वारा अपने घर की महिलाओं को आगे कर किसानों को छेड़छाड़ और अन्य झूठे मुकदमों में फंसाने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के किसान अत्यंत भयभीत हैं।
खरीफ सीजन नजदीक, आजीविका पर संकट
किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट आगामी खरीफ सीजन की बुआई को लेकर खड़ा हो गया है। मानसून सिर पर है और बुआई का समय बेहद नजदीक है। अगर समय रहते यह शासकीय रास्ता नहीं खोला गया, तो किसान अपने खेतों तक खाद, बीज और ट्रैक्टर नहीं ले जा पाएंगे। ऐसे में उनकी पूरी फसल चौपट होने और आजीविका छिन जाने का खतरा मंडरा रहा है।
कलेक्टर और एसपी की जनसुनवाई मे पहुंचे पीड़ित, न्याय की गुहार-
तहसीलदार सोयतकला से तत्काल कोई रिलीफ नहीं मिलने पर पीड़ित किसान अब कलेक्टर और एसपी की जनसुनवाई मे पहुंचे हे और मनोहरलाल सुतार, हीरालाल सुतार, मुकेश भील, मोहन भील सहित दर्जनों पीड़ित किसानों ने मंगलवार को कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक (SP) आगर-मालवा को एक लिखित आवेदन सौंपा है। किसानों ने मांग की है कि:–
1. अपर कलेक्टर के आदेश का कड़ाई से पालन करवाते हुए पुलिस बल की मौजूदगी में शासकीय रास्ता तुरंत खुलवाया जाए।
2. किसानों को डराने-धमकाने, मारपीट करने और जातिसूचक गालियां देने वाले आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
तहसीलदार को हे पटवारी रिपोर्ट का इंतजार
गिरीश न्यूज़ में इस संबंध में जब तहसीलदार सोयतकला राजेश श्रीमाल से चर्चा कि तो उन्होंने बताया कि किसानों के लिए शासकीय रास्ता खुलवाने का अंतरीम आदेश उन्होंने ही दिया है और उसके अनुसरण में एक बार रास्ता खुलवाया जा चुका है पर अभी जानकारी में आ रहा है कि दबंगों ने फिर कब्जा कर रास्ते को बंद कर दिया है इस संबंध में हमारे न्यायालय में एक प्रकरण पहले से विचारधीन हे। मे इस संबंध मे पटवारी से रिपोर्ट मंगवा रहा हूँ। रिपोर्ट मिलते ही जल्द ही न्यायोचित कार्रवाई करेंगे।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन कितनी तत्परता दिखाता है, या फिर इन गरीब किसानों को न्याय के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
