आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर एक बार फिर विवादों के कारण चर्चा में है। इस बार मामला मंदिर में पूजा-पाठ और अनुष्ठान करने वाले पुजारियों की पात्रता से जुड़ा हुआ है। मंदिर प्रबंधन द्वारा हाल ही में जारी नई व्यवस्था के अनुसार मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों के लिए कक्षा 12वीं में संस्कृत विषय होना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रबंधन के इस निर्णय का मंदिर के कई पुजारी विरोध कर रहे हैं। इसी को लेकर पुजारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और नई व्यवस्था को वापस लेकर पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
पुजारियों का कहना है कि नई पात्रता लागू होने के कारण उन्हें मंदिर में हवन-पूजन और अनुष्ठान करने से रोका जा रहा है, जिससे उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पंडित ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि वर्षों से सेवा दे रहे पुजारियों को अचानक इस तरह से प्रतिबंधित करना अन्यायपूर्ण है।
पुजारियों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी आजीविका को ध्यान में रखते हुए पुराने नियमों के अनुसार उन्हें मंदिर में सेवा करने की अनुमति दी जाए। साथ ही संजय शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, परशुराम सेना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन का रास्ता भी अपनाया जाएगा-
