आगर मालवा।
आगर के बड़ा तालाब नाव घाट स्थित कच्चे श्मशान की भूमि पर प्रस्तावित फायर स्टेशन निर्माण को लेकर सर्व हिंदू समाज और प्रशासन के बीच जारी विवाद अभी भी थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद दो दिन के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया था, लेकिन इसके बाद निर्माण एजेंसी ने एक बार फिर काम शुरू कर दिया।
निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की जानकारी मिलते ही सर्व हिंदू समाज के लोग मौके पर पहुंचे और काम रुकवाने का प्रयास किया। इस दौरान निर्माण एजेंसी ने स्पष्ट किया कि उनके पास कार्य रोकने का कोई लिखित आदेश नहीं है और बार-बार काम रुकने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी आधार पर एजेंसी ने निर्माण जारी रखने की बात कही।
इसके बाद सर्व हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान से चर्चा कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद एक बार फिर निर्माण कार्य रोक दिया गया। अगले दिन नवागत कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना ने सर्व हिंदू समाज के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी।
बाद में प्रभारी मंत्री की मध्यस्थता में क्षेत्रीय विधायक मधु गहलोत, भाजपा जिला अध्यक्ष ओम मालवीय, मंडल अध्यक्ष भरत प्रजापत, एसडीएम मिलिंद ढोके, तहसीलदार विजय सेनानी तथा अन्य अधिकारियों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सर्व हिंदू समाज के लोगों को आश्वस्त किया कि मामले में 31 जुलाई को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के मध्य बैठक कर इस पर उचित एवं जन भावना के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।
सर्व हिंदू समाज का कहना है कि जिस स्थान पर फायर स्टेशन बनाया जा रहा है, वह वर्षों पुरानी श्मशान भूमि है। उनका दावा है कि आसपास श्मशान, कब्रिस्तान, बालक एवं बालिका विद्यालय, गौशाला तथा घना बाजार क्षेत्र होने के कारण यह स्थान फायर स्टेशन के लिए उपयुक्त नहीं है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी कठिनाई हो सकती है। संगठन ने प्रशासन से सभी पहलुओं पर विचार कर वैकल्पिक स्थान पर फायर स्टेशन बनाने का निर्णय लेने की मांग की है।
फिलहाल निर्माण कार्य बार-बार रुकने और फिर शुरू होने से मामला पूरी तरह अनिर्णीत बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच 31 जुलाई को होने वाली बैठक पर टिकी हुई है जहां इस पर अंतिम निर्णय लेने की बात कही जा रही है-
