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आगर-मालवा-

जिला अस्पताल आगर में कथित चिकित्सकीय लापरवाही से 9 वर्षीय बालिका की मौत के मामले में पिछले तीन माह से कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित पक्ष का धैर्य जवाब दे गया। पीड़ित परिवार समाजसेवी विनीत मालवीय के साथ कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गया। करीब तीन घंटे तक चले इस धरने के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कई बार समझाइश दी , जिसके बाद कलेक्टर श्रीमती प्रीति यादव से मुलाकात होने पर धरना समाप्त हुआ।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि ग्राम भदवासा निवासी बालुराम मालवीय की 9 वर्षीय पुत्री टीना का जिला अस्पताल में उपचार के दौरान डॉक्टर के. के. सागरिया एवं डॉक्टर जे. सी. परमार की लापरवाही एवं समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। बाद में उसे अहमदाबाद ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस मामले में परिजनों ने पिछले तीन माह से लगातार शिकायतें और आवेदन दिए और जिला अस्पताल द्वारा की गई प्रथम जांच और डॉक्टरों द्वारा उसके बाद किए गए टीना के इलाज की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार चिकित्सक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई।

धरने के दौरान सबसे पहले डिप्टी कलेक्टर सर्वेश यादव एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और पीड़ित पक्ष को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन कलेक्टर श्रीमती प्रीति यादव से सीधे मुलाकात की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसडीएम मिलिंद ढोके पहुंचे और उन्होंने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया कि उनकी कलेक्टर से मुलाकात कराई जाएगी। आश्वासन मिलने के बाद पीड़ित पक्ष कलेक्टर कक्ष पहुंचा और कलेक्टर को पूरे घटनाक्रम एवं अपनी पीड़ा से अवगत कराया।

पीड़ित पक्ष द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टर के. के. सागरीय एवं डॉक्टर जे सी परमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच रिपोर्ट आने के बावजूद किडनी इन्फेक्शन जैसी बीमारी की गंभीरता को नजरअंदाज किया तथा समय पर उचित उपचार और उच्च संस्थान के लिए रेफर नहीं किया। साथ ही डॉक्टर के.के. सागरिया ने उन्हें उनके निजी क्लिनिक का कार्ड देते हुए उन्हें वहां आने के लिए बाध्य करने की कोशिश की पर पीड़ित पक्ष की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वह उनके निजी क्लीनिक पर नहीं गए और जिला चिकित्सालय में ही इलाज कराते रहे इसके साथ ही जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली, मरीजों के प्रति व्यवहार तथा सरकारी चिकित्सकों द्वारा निजी क्लीनिक संचालन जैसे गंभीर मुद्दे भी उठाए गए हैं। पीड़ित पक्ष ने बताया कि जब वह टीना को अहमदाबाद के अस्पताल में ले गए तो उन्होंने आगर की जांच रिपोर्ट देखकर बताया कि पहली जांच में ही किडनी में इन्फेक्शन साफ दिख रहा है और सही इलाज न मिलने के कारण किडनी काफी अधिक खराब हो चुकी है और अब बच्ची को बचाना काफी कठिन होगा और अंततः फिर एक माह से अधिक चले इलाज के बाद टीना की मौत हो गई है। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की और जिला अस्पताल द्वारा की गई प्रथम जांच और डॉक्टरों द्वारा उसके बाद किए गए टीना के इलाज की निष्पक्ष जांच कर उसमे दोषी पाए जाने पर दोषी डॉक्टरो पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई साथ ही पीड़ित पक्ष ने विनीत मालवीय के नेतृत्व में प्रशासन से मांग की है की जांच दल का प्रभारी किसी डॉक्टर को न बनाते हुए प्रशासनिक अधिकारी को ही बनाया जाए।

समाजसेवी विनीत मालवीय ने गिरीश न्यूज़ को बताया कि कलेक्टर श्रीमती प्रीति यादव ने पूरे प्रकरण को नोट किया है तथा निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।

इस संबंध में जब दोनों आरोपी डॉक्टरो से उनका पक्ष जानना चाहा तो 2-3 बार काल करने के बाद भी उन्होंने उनका मोबाइल नहीं उठाया है। वैसे जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों द्वारा सरकारी अस्पताल के मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचाना, लगातार नियम विरुद्ध तरीके से निजी चिकित्सालयों में जाकर चिकित्सा सेवाएं देना एवं सरकारी अस्पताल के मरीजों को अपने निजी क्लीनिक पर आने के लिए विवश करना, अपनी ड्यूटी समय पर भी निजी क्लिनिको पर प्रैक्टिस करते पाए जाना जैसे आरोप पहले भी लगातार लगते रहे है पर अफ़सोस की बात यह है कि वर्षों से चली आ रही यह एक ऐसी समस्या है जिसका हल अभी तक कोई नहीं निकाल पाया है।

अब इसे शासन और प्रशासन की इच्छा शक्ति में कमी कहा जाए या उनकी विवशता यह तो आप जन ही तय कर सकते हैं।

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