आगर मालवा –
सुसनेर के ग्राम पंचायत नांदना में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। पीड़ित आवेदको ने बताया कि ग्राम में पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक द्वारा लगातार किए जा रहे हैं भ्रष्टाचार से परेशान होकर हमारे द्वारा पंचायत के कामकाज से संबंधित जानकारी मांगने के बाद ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि पीरुलाल गुहाटिया द्वारा उन पर आवेदन वापस लेने का दबाव बनाया गया और आवेदन वापस नहीं लेने पर उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कराने की धमकी दी गई। पीड़ित आवेदको द्वारा बताया गया कि ग्राम पंचायत द्वारा जानकारी न देने पर उनके द्वारा जनपद पंचायत सुसनेर में 27 अगस्त को प्रथम अपील प्रस्तुत की गई उसके बाद फिर सरपंच प्रतिनिधि द्वारा उन्हें झूठा एससी एसटी एक्ट प्रकरण में फसाने की धमकी दी गई। इस संबंध में उन्होंने पहले ही 8 सितम्बर को कलेक्टर की जनसुनवाई में एवं फिर 12 सितम्बर को सुसनेर थाना में लिखित शिकायतें प्रस्तुत कर दी थीं और बताया था की सूचना अधिकार आवेदन लगाने के चलते उन्हें इस प्रकार की धमकी दी जा रही है और आवेदन वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा हे। इसके बाद फिर 15 सितम्बर की सुबह जब सरपंच प्रतिनिधि अपने समर्थको के साथ हमारे घर आकर विवाद करने लगा तो शांति भंग होने की संभावना के चलते हमने 112 डायल कर पुलिस को बुलाया और पुलिस ने वहां आकर झगड़े को शांत कराया था उसके बाद इस घटनाक्रम को लेकर भी फिर 15 सितंबर की सुबह ही सुसनेर थाने पर लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी ।
इसके बावजूद अब सरपंच प्रतिनिधि की ओर से उनके खिलाफ इसी कानून के तहत अपराध दर्ज करा दिया है और पुलिस ने भी बिना जांच किए हमारे खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया हे।
23 जुलाई को लगाया था RTI आवेदन
दस्तावेजों के अनुसार ग्राम नांदना निवासी रामेश्वर जाट सहित ग्रामीणों द्वारा 23 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत नांदना में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन में वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक ग्राम पंचायत में कराए गए सार्वजनिक निर्माण कार्यों, उनकी लागत, ठहराव प्रस्ताव, भुगतान एवं बिल-वाउचर सहित विभिन्न जानकारी मांगी गई थी।
इसके अलावा हनुमान मंदिर के पास सांसद निधि से निर्मित टीन शेड की स्वीकृति एवं व्यय राशि, पंचायत को विभिन्न मदों से प्राप्त राशि और उसके व्यय का विवरण, पीएम आवास की सूची, आय-व्यय संबंधी जानकारी तथा ग्राम विकास कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे गए थे।
ग्रामीणों के अनुसार निर्धारित अवधि में जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने पर 27 अगस्त 2026 को जनपद पंचायत सुसनेर के प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की गई।
जानकारी मांगने के दौरान धमकी देने का आरोप
प्रथम अपील में आवेदक ने आरोप लगाया कि जानकारी मांगने के बाद उन्हें धमकाया गया तथा आवेदन वापस लेने के लिए कहा गया। आरोप के मुताबिक आवेदन वापस नहीं लेने पर उनके खिलाफ हरिजन एक्ट के तहत कार्रवाई कराने की धमकी पीरुलाल गुहाटिया द्वारा दी गई।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सरपंच एवं उनके समर्थकों की ओर से लगातार धमकियां मिलने के कारण गांव में भय और तनाव का वातावरण बना हुआ है।
इसके बाद SC/ST एक्ट में कार्रवाई की शिकायत
इसी घटनाक्रम को लेकर उन्होंने पुलिस अधीक्षक से भी आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पीड़ित आवेदको ने मांग की है कि उनके विरुद्ध की गई शिकायत की पहले निष्पक्ष जांच की जाए और वास्तविक तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का सवाल—पहले धमकी की शिकायत, फिर उसी कानून बिना जाँच के कार्रवाई क्यों?
पूरे मामले में ग्रामीणों का मुख्य सवाल यही है कि जब उन्होंने पहले ही संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर कथित धमकी की शिकायत कर दी थी, तो उसके बाद उनके खिलाफ उसी कानून के तहत शिकायत दर्ज करने के पहले जांच क्यों नहीं की गई ।
पीड़ित आवेदको ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि RTI आवेदन, प्रथम अपील, जनसुनवाई में दिए गए आवेदन, पुलिस को दी गई शिकायतों और वर्तमान कार्रवाई—सभी को एक साथ देखते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जाए।
सरपंच प्रतिनिधि ने बताया आरोपो को बेबुनियाद
हालांकि, सरपंच पीरुलाल गुहाटिया से जब गिरीश न्यूज़ ने उन पर लग रहे इस तरह के आरोपों पर चर्चा की तो उन्होंने बताया कि आरटीआई के आवेदन और उनके साथ की गई बदसूलुकी अलग-अलग मामला हे उनके साथ 15 सितम्बर को इस तरह का घटनाक्रम हुआ था जिसके बाद की गई शिकायत के आधार पर पुलिस सुसनेर द्वारा यह अपराध दर्ज किया गया है।
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