धार। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और संवेदनशील भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने पूरी तरह से कमर कस ली है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के आदेशों की गलत व्याख्या और अफवाहें फैलाने वालों को पुलिस ने बेहद सख्त और सीधे शब्दों में चेतावनी दी है।
गुरुवार को संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकालते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने खुली जीप से माइक संभालकर मोर्चा लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “अब तक का समय उनका (संदेहियों/अफवाहबाजों का) था, लेकिन अब सिर्फ और सिर्फ विधि का शासन (कानून का पालन) होगा। जिसकी हिम्मत है, जिसे लगता है कि वह ऐसा (माहौल खराब) कर सकता है, वह कोशिश करके देख ले; हम पूरी तरह तैयार हैं।”
छावनी में तब्दील हुआ इलाका, कमांडो तैनात
भोजशाला और उसके आसपास के सुरक्षा घेरे को बेहद कड़ा कर दिया गया है। पुलिस के फ्लैग मार्च में अत्याधुनिक हथियारों (मशीन गन) से लैस कमांडो और भारी संख्या में पुलिस बल मुस्तैद नजर आया। अधिकारी की चेतावनी के बाद सुरक्षा बलों ने ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारे लगाए, जिससे क्षेत्र में असामाजिक तत्वों को साफ संदेश मिल गया है कि किसी भी प्रकार की अशांति फैलाने पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून तोड़ने वालों पर ऐसी सख्त कार्रवाई होगी, “जो उन्होंने कभी सोची भी नहीं होगी।”
क्या है विवाद और पृष्ठभूमि?
धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर विवाद दशकों पुराना है। हिंदू पक्ष का मानना है कि यह मां सरस्वती (वाग्देवी) का प्राचीन मंदिर है।मुस्लिम पक्ष इसे कमल मौला की मस्जिद के रूप में देखता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की पुरानी व्यवस्था के मुताबिक, यहाँ प्रत्येक मंगलवार को हिंदू समुदाय को पूजा करने और प्रत्येक शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई थी हालांकि हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर इस प्रकरण का निपटारा करते हुए भोजशाला को मंदिर घोषित कर दिया है और इसके बाद हिन्दू समुदाय द्वारा आज शुक्रवार भोजशाला में महा आरती का आयोजन किया गया है।
प्रशासन की अपील: अफवाहों से बचें
जिला और पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी भ्रामक खबर या अफवाह पर भरोसा न करें। शहर में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए हर नागरिक का सहयोग अपेक्षित है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां इंटरनेट मीडिया पर भी पैनी नजर रख रही हैं।
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