आगर-मालवा। जिले के ग्राम भदवासा निवासी बालुराम मालवीय की 10 वर्षीय पुत्री कु. टीना की मौत के मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा करवाई गई जांच में जिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल किशोर सागरिया की आंशिक लापरवाही सामने आई है।
इस संबंध में जब गिरीश न्यूज़ ने CMHO डॉ. दिनेश दहलवार से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि जांच प्रतिवेदन अग्रिम कार्यवाही हेतु आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल को भेजा गया है, डॉक्टर के खिलाफ कोई भी कार्यवाही इसी स्तर से हो सकेगी।
जांच रिपोर्ट में क्या है –
शिकायतकर्ता बालुराम की शिकायत पर CMHO के आदेश क्र./शिकायत/2026/3844 दिनांक 13.08.2026 पर जांच दल गठित किया गया था। जांच में सामने आया कि –
1. मृतका टीना दिनांक 21.07.2025 को शरीर दर्द व कमजोरी से जिला चिकित्सालय में भर्ती हुई, हीमोग्लोबिन 6.5 ग्राम था, रक्त चढ़ाकर 28.07.2025 को डिस्चार्ज कर दिया गया। 2. पुनः 14.09.2025 को भर्ती हुई, हीमोग्लोबिन 4.2 ग्राम था, 02 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और 20.09.2025 को डिस्चार्ज कर दिया गया। दोनों बार रक्त चढ़ाने के बाद भी हीमोग्लोबिन में सुधार नहीं हुआ। 3. सबसे गंभीर बात – 10 वर्ष की उम्र में वजन मात्र 20 किलोग्राम होने पर भी विस्तृत जांच नहीं कराई गई और न ही हायर सेंटर (बड़े विशेषज्ञ अस्पताल) रेफर किया गया। 4. दिनांक 23.12.2025 की पैथोलॉजी रिपोर्ट में सीरम क्रिएटिनिन 6.19 मिलीग्राम/डीएल और सीआरपी 22.56 था, जो गंभीर किडनी खराबी / इंफेक्शन को दर्शाता है।
जांच अधिकारी डॉ. आलोक श्रीवास्तव और डॉ. हरीश आर्य ने अपने स्पष्ट अभिमत में लिखा है कि यदि 23.12.2025 के बाद भी परिजन बच्ची को जिला अस्पताल लाते तो उसे उत्तम उपचार या हायर सेंटर रेफर किया जा सकता था, परंतु डॉ. सागरिया द्वारा विस्तृत जांच/उपचार नहीं कराया गया, जिससे स्थिति किडनी बीमारी की ओर चली गई। अंततः परिजन उसे स्वयं सिविल अस्पताल अहमदाबाद ले गए, जहां क्रोनिक किडनी डिजीज और सेप्टिसीमिया के कारण डायलिसिस हुई और 07.02.2026 को उसकी मृत्यु हो गई।
जांच में निजी अस्पताल में बार-बार बुलाने के आरोप में ठोस साक्ष्य / निजी ओपीडी पर्ची प्रस्तुत नहीं होने से वह आरोप निराधार पाया गया, लेकिन उपचार में आंशिक लापरवाही सिद्ध हुई है।
इधर मृतका के पिता बालुराम मालवीय ने दिनांक 29/09/2026 को थाना प्रभारी आगर को आवेदन देकर जांच प्रतिवेदन के आधार पर डॉ. कमल किशोर सागरिया के विरुद्ध उचित धाराओं में FIR दर्ज करने की मांग की है।


